Citizen Charter


सिटीजन चार्टर

प्रदेश में सिंचाई विभाग, उ.प्र. द्वारा प्रदान की जाने वाली मुख्य सेवा नहरोंएवंनलकूपों के कमांड क्षेत्र में कृषकों को विभिन्न फसलों के मानक के अनुसार सिंचाई हेतु सस्ती दरों पर जल उपलब्ध कराना है। जिससे कृषक अपनी उपज बढाकर खुशहाल हो सके तथा प्रदेश एवं देश को स्वावलम्बी बना सके।

(1) सेवा का मानक एवं समय सीमा:

कृषकों को आसानी एवं समयबद्ध तरीके से प्रर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराने हेतु सबसे पहले प्रत्येक नहर प्रणाली के शीर्ष पर पिछले दस वर्षों में जल उपलब्धता के आधारा पर न्यूनतम 75% उलब्ध जल का निर्धारण किया जाता है। तदानुसार एक समयबद्ध सिंचाई सेवा का अनुमानित कार्यक्रम (रोस्टर) एक निर्धारित प्रारूप पर प्रणालीवार वर्ष में दो बार (रबी एवं खरीफ) निर्धारित किया जाता है। इसकी सहमति/अनुमोदन जिलाधिकारी/मुख्य विकास अधिकारी, कृषि विभाग एवं समादेश क्षेत्र के अधिकारी, अधीक्षण अभियन्ता के साथ-साथ सिंचाई एवं ऊर्जा सलाहकार समिति तथा "जनपद सिंचाई बन्धु" से लिया जाता है। रोस्टर का अनुमोदन होने के पश्चात् ही इसे क्रियान्वयन हेतु छपवाया जाता है।

रोस्टर छपवाने के पश्चात फसल के शुरू में ही इसको सभी सम्बंधित सांसदों, विधायकों, ब्लाक प्रमुखों को एवं खण्ड विकास अधिकारी के माध्यम से सभी प्रधानों को भेज दिया जाता है ताकि काश्तकारों को पूरी फसल में उपलब्ध कराये जाने वाली पानी के बारे में जानकारी हो सके और तदानुसार किसान अपनी फसल को नियोजित कर सके। इस रोस्टर को खण्ड विकास अधिकारी के दफ्तर तहसील आदि में भी चस्पा किया जाता है तथा जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी आदि को भी भेजा जाता है जिससे कि इसका व्यापक प्रसारण हो सके।

सिचाई के पश्चात् सिंचित क्षेत्र को सींचपाल दर्ज करत हैं तथा इसकी पैमाइश अमीन द्वारा की जाती है। अमीन पैमाइश करने से पहले ग्राम पंचायत पर चस्पा की जाने वाली नोटिस के माध्यम से कास्तकारों को पैमाइश की जाने वाली तिथि की सूचना देते हैं। इसकी सूचना सम्बन्धित तहसीलदार को भी दी जाती  है ताकि पैमाइश के समय स्थल पर लेखपाल भी उपलब्ध रहें। काश्तकारों के अपेक्षा की जाती है कि वे पैमाइश के समय स्वयं उपस्थित रहें और यदि खेल को दर्ज करने में कोई भी गलती हुई हो तो उसे इंगित करें तकि उसका निस्तारण उसी समय किया जा सके। पैमाइश के पश्चात् काश्तकारों को पर्ची भंजी जाती है जिसमें उनको सिंचाई के बारे में सूचना दी जाती है तथा कृषकों से यह अपेक्षा की जाती है कि पर्चे में रकबा अथवा जिन्स गलत लिखी हुई हो अथवा सिंचाई डाल (पलों) हुई हो या अन्य कोई त्रुटि हो तो इसकी सूचना लिखित रूप से पर्चा मिलने के तीस दिन के अन्दर दें। यदि खेत नहर के पानी से बिल्कुल नहीं सींचा गया है परन्तु सिंचाई शुल्क लगाया गया है तो इसकी सूचना 21 दिनों के अन्दर दें। यह सूचनायें अधिशासी अभियन्ता/सहायक अभियन्ता/उपराजस्व अधिकारी/सम्बन्धित जिलेदार को दी जा सकती है। इन सभी शिकायतों की जांच शिकायत प्राप्त होने के पन्द्रह दिनों के अन्दर की जायेगी तथा फौरन इस पर निर्णय लिया जायेगा, जिसकी सूचना शिकायतकर्ता काश्तकार को भी फौरन दी जायेगी। पैमाइश के पश्चात् जमाबन्दी बनाई जाती है जो रबी में पहली मई  तथा खरीफ में पहली दिसम्बर को तहसील भेजी जाती है, जिसकी वसूली तहसील के कर्माचारी के कर्मचारियों द्वारा की जाती है। उल्लेखनीय है, यदि प्रार्थनापत्र सिंचाई की दर घटाने अथवा छूट के लिए है और यदि फसल प्रार्थना पत्र प्राप्त करवाने के पन्द्रह दिनों के अन्दर काट दी जाती है तो प्रार्थनापत्र निरस्त किया जा सकता है।

अत: काश्तकारों से यह अपेक्षा की जाती है यदि काई एतराज हो तो उसक निर्धारित समय से सक्षम अधिकारी को प्राप्त कराये एवं समय का पालन करें।

(2)  सेवा की सुनिश्चितता

सिंचाई विभाग जनता की सेवा में सदैव प्रयत्नशील रहता है। विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी एवं कर्मचारी हर सम्भव प्रयास करते हैं कि कृषकों को रोस्टर के अनुसार पर्याप्त मात्रा में पानी मिले। रोस्टर तैयार करने में यह ध्यान दिया जाता है कि कृषकों को सामान्य स्थिति में कोई परेशानी न हो तथा वह ज्यादा से ज्यादा सिंचाई के पानी का फायदा उठा सके परन्तु प्रकृति के सामान्य व्यवहार के विरूद्ध स्थिति उत्पन्न होने, प्राकृतिक आपदा एवं सिंचाई विभाग के नियंत्रण के परे आकस्मिक स्थितियों में सिंचाई विभाग के अधिकारियों द्वारा रोस्टर में परिवर्तन किया जा सकता है। जिसमें अधिक जनसंख्या के फायदे को ध्यान में रखते हुए विवेकानुसार निर्णय लिया जाता है, जिसकी सूचना काश्तकारों को विभिन्न श्रोतों से दी जाती है। इसके साथ ही जनता से भी यह अनुरोध है कि नहरों को काटकर बन्धा लगाकर तथा अवैधानिक तरीक से पानी न ले, इससे न केवल नहर क्षतिग्रस्त होती है बल्कि अन्य काश्तकारों को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पाता। इस प्रकार के अवैधानिक तरीके प्रयोग करना, नहर पटरियों का दुरूपयोग करना, सरकारी सम्पत्ति को क्षति पहुंचाना, नियमानुसार दण्डनीय अपराध है। कृषि विशेषज्ञों ने अब यह साबित कर दिया है कि फसल में उचित समय से वांछित मात्रा में पानी देने से ही पैदावार अधिकतम होती है। यदि वांछित मात्रा से अधिक अथवाकम पानी दिया जाता है तो उत्पादन में कमी आ जाती है। पानी की उचित मात्रा एवं सही समय के लिए काश्तकार कृषि विभाग से मदद ले सकते हैं। आवश्यकता से अधिक पानी लेकर काश्तकार न केवल अपना नुकसान करते हैं बल्कि अन्य काश्तकारों का भी (कम पानी मिलने के कारण) नुकसान करते हैं और इस प्रकार पानी के दुरूपयोग से अन्जाने में राष्ट्रीय क्षति हो जाती है।

(3) सूचना की आसानी से उपलब्धता-कर्मचारी गण की शिष्टता एवं सहायता

इसका विस्तृत विवरण पैरा (1) में दिया जा चुका है। इसके अतिरिक्त जिला स्तर पर प्रत्येक महीने के द्वितीय मंगलवार को सिंचाई बन्धु की जिलाधिकारी द्वारा निर्धारित स्थान पर बैठक होती है। इसी प्रकार महीने के प्रथम एवं तृतीय मंगलवार को तहसील दिवस आयोजित किया जाता है तथा नलकूप से सिंचाई हेतु ब्लाक सिंचाई बन्धु (नलकूप) की समिति गठित की गई है, जिसकी बैठक माह में दो बार होती है। इसके किये जाते हैं इन सभी समितियों का विस्तृत विवरण पैरा (4) में दिया गया है।

(4) नागरिकों के साथ विचार-विमर्श

जनपद में नागरिकों के साथ विचार-विमर्श तथा सुझाव हेतु जिला सिंचाई बन्धु की कमेटी गठित है। जनपद के समस्त सांसद राज्य सभा सदस्य, विधयक, विधान परिषद सदस्य, ब्लाक प्रमुख, शासन द्वारा नामित एक नागरिक आदि उसके सदस्य होते हैं तथा इस मीटिंग की अध्यक्षता भी जनप्रतिनि‍धि करते हैं एवं इस कमंटी के सचिव जनपद के सिंचाई विभाग के नोडल अधिशासी अभियन्ता होते हैं एवं इस कमेटी के सचिव जनपद के सिंचाई विभाग के नोडल अधिशासी अधिभियन्ता होते हैं। इस मीटिंग में जनपद के समस्त अधिकारी (अथवा उनके प्रतिनिधि) जिनका सम्बन्ध कृषि एवं सिंचाई से हो, उपस्थित होते हैं जिससे जनता की समस्याओं की जानकारी ली जाती है तथा आपसी विचार-विमर्श से इसका निदान करने की कार्यवाही की जाती है। सामान्यत: जो समस्याये आती है जिनका समाधान करने की प्रक्रिया नीचे दी जा रही है:

(अ) जनपद सिंचाई बन्धु

यह मीटिंग जनपद स्तर पर प्रत्येक महीने के द्वितीय मंगलवार को होती है। आमतौर पर कृषकों को निम्न प्रकार की समस्याओं पर चर्चा के उपरान्त यथासम्भव निराकरण हेतु वांछित कार्यवाही की जाती है:

क. नहरों की समुचित सफाई का विवरण एवं कार्यक्रम।

ख. नहरों की कटिंग एवं टेल तक पानी पहुंचाने की समस्यायें।

ग. रोस्टर के अनुसार नहरों का चलना।

घ. नहरो के कुलाबों की व्यवस्था से सम्बन्धि समस्यायें।

ङ. राजकीय नलकूपों के संचालन से सम्बन्धित समस्यायें।

च. नलकूपों की बन्दी की समीक्षा।

छ. सिंचाई शुल्क निर्धारण सम्बन्धी समस्यायें।

ज. कृषकों से प्राप्त अन्य प्रकार की शिकायतों का निराकरण।

जनपद सिंचाई बन्धु की बैठक की कार्यवृत्ति एक पंजिका में रखी जाती है। कृषकों की निजी समस्याओं पर विचार-विमर्श उपरान्त समाधान हेतु निश्चित तिथि निर्धारित की जाती है। यह प्रयास किया जाता है कि प्रत्येक बैठक में उठाई गई समस्याओं पर की गई कार्यवाही की सूचना अगली बैठक में निश्चित रूप से प्रस्तुत की जाये। जिन समस्याओं का समाधान जनपद स्तर पर सम्भव न हो, उनका विवरण सक्षम अधिकारियों को भेज दिया जाता है ताकि उचित स्तर पर निर्णय लेने की कार्यवाही की जा सके।

(ब) तहसील दिवस

जनसमस्याओं के निवारण हेतु प्रत्येक जनपद में माह के प्रथम व वृतीय मंगलवार को प्रत्येक तहसील मुख्यालय पर प्रात: 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक 'तहसील दिवस' आयोजित किया जाता है। यह तहसील दिवस एक तहसील में जिलाधिकारी की ध्यक्षता में आयोजित किया जाता है। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित तहसील दिवस कार्यक्रम में सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियन्ता, क्षेत्राधिकारी तथा तहसील एवं विकास खण्ड स्तरीय अधिकारी अनिवार्य रूप से भाग लेते हैं। परगना मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में आयोजित 'तहसील दिवस' में जो भी जन समस्यायें अथवा शिकायतें प्राप्त हों तो उनका निस्तारण यथासम्भव मौके पर ही किया जाता है। यदि यह सम्भव न हो तो उसके निस्तारण के लिए एक उपयुक्त समय सुनिश्चित किया जाता है और इस निश्चित समय में उस समस्या के निस्तारण हेतु अधिकारी भी नियत कर दिये जाते हैं। 'तहसील दिवस' में जो भी मामले प्रस्तुत होते हैं उन सभी का पूरा रिकार्ड रखा जाता है तथा जिन मामलों में कार्यवाही करने हेतु निश्चित समय दिया गया है उसका रिकार्ड अलग से रखा जाता है ताकि निर्धारित समय में उसके निस्तारण की समीक्षा भली-भांति की जा सके। मण्डल स्तरीय अधिकारी प्रत्येक मंगलवार को किसी एक तहसील में भ्रमण करके 'तहसील दिवस' में सम्मिलित होते हैं।

जनसमस्याओं एवं शिकायतों के निवारण हेतु प्रत्येक जिलास्तरीय अधिकारी अथवा उनका प्रतिनिधि कार्यालय कक्ष में प्रतिदिन उपस्थित रहते हैं। प्रत्येक कार्यालय में मुलाकातियों का एक रजिस्टर एक निर्धारित प्रारूप में रखा जाता है। मुलाकाती की समस्या के सम्बन्ध में यथा आवश्यक समुचित निर्देश कार्यालय अध्यक्ष द्वारा अपने कार्यालय/अधीनस्थ को दिये जाते हैं।


(स) ब्लाक सिंचाई बन्धु (नलकूप)

प्रदेश में कृषकों को अधिक से अधिक सिंचन सुविधा उपलब्ध कराने के परिप्रेक्ष्य में राजकीय नलकूपों से सम्बन्धित समस्याओं का स्थानीय स्तर पर यथासम्भव निराकरण करने तथा जनप्रतिनिधियों और  अधिकारियों के बीच पारस्परिक सामंजस्य एवं विचार विनिमय के उद्देश्य से शासन द्वारा ब्लाक स्तर पर ब्लाक सिंचाई बन्धु (नलकूप) का गठन किया गया है। ब्लाक प्रमुख, ज्येष्ठ उप ब्लाक प्रमुख, सहायक अभियन्ता (यांत्रिक)  नलकूप, खण्ड विकास अधिकारी, अवर अभियन्ता (राज्य विद्युत परिषद), शासन द्वारा नामित तीन व्यक्ति उसके सदस्य हैं। सहायक अभियन्ता (यांत्रिक) नलकूप इसके सदस्य सचिव हैं। ब्लाक सिंचाई बन्धु (नलकूप) की बैठक ब्लाक मुख्यालय पर ब्लाक प्रमुख की अध्यक्षता में माह में दो बार होती है। बैठक की निश्चित तिथि, समय एवं स्थान सदस्य सचिव, अध्यक्ष की सहमति से निर्धारित करते हैं।

ब्लाक सिंचाई बन्धु (नलकूप) में कृषकों की निम्न प्रकार की समस्याओं पर चर्चा के उपरान्त निराकरण हेतु वांछित कार्यवाही की जाती है।

(क) राजकीय नलकूपों के संचालन में सम्बन्धित समस्यायें।

(ख) राजकीय नलकूपों की बन्दी की समीक्षा।

(ग) राजकीय नलकूपों की गूलों/पी.वी.सी. पाइप लाइन की मरम्मत की समीक्षा।

(घ) नलकूप के कमाण्ड क्षेत्र में फसल की बोवाई।

(ड.) सिंचाई शुल्क निर्धारण सम्बन्धी समस्यायें।

(च) राजकीय नलकूपों पर विद्युत आपूर्ति की समीक्षा।

(छ) कृषकों से प्राप्त अन्य प्रकार की शिकायतों का निराकरण।

ब्लाक सिंचाई बन्धु (नलकूप) की बैठक की कार्यवृत्ति एक प्रस्तिका में रखी जाती है। कृषकों की निजी समस्याओं पर विचार-विमर्श उपरान्त समयधान हेतु निश्चित विथि निर्धारित की जाती है, यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्येक बैठक में उठाई गई समस्याओं पर की गई कार्यवाही की सूचना अगली बैठक में निख्यित रूप से प्रस्तुत की जाए। जिन समस्याओं का समाधान ब्लाक स्तर पर सम्भव न हो उनका विवरण सम्बन्धित अधिशासी अभियन्ता (नलकूप) को भेज दिया जाये ताकि उचित स्तर पर निर्णय लेने की कार्यवाही उनके द्वारा की जा सके।

सम्बन्धित अधिशासी अभियन्ता (नलकूप) प्रत्येक माह एक विकास खण्ड में ब्लाक सिंचाई बन्धु (नलकूप) की बैठक में भाग लेते हैं।

(द) किसान सेवा केन्द्र

प्रत्येक वृहस्पतिवार को प्रात: 10 बजे से 5 बजे तक प्रत्येक न्याय पंचायत में निर्धारित स्थान पर किसान सेवा केन्द्र संचालित किये जाते हैं। इन केन्द्रों का मुख्य उद्देश्य जन सुविधाओं को जनता के द्वार उपलब्ध कराना, अन्तर विभागीय समन्वय, कर्मचारियों की निश्चित उपलब्धता, जनता परिवादों का निस्तारण प्रभावी अनुश्रवण करना, जनचेतना में वृद्धि करना है। किसान सेवा केन्द्र के प्रभावी सुचालन हेतु एक पर्यवेक्षक, जिलाधिकारी द्वारा प्रभारी अधिकारी नामित किये जाते हैं। किसान सेवा केन्द्रों पर सिंचाई विभाग के सींचपाल तथा ट्यूबवेल मैकेनिक माह के प्रत्येक पहले तथा तीसरे वृहस्पतिवार को पूरे समय उपस्थित रहते हैं। यदि किसी वृहस्पतिवार को सार्वजनिक अवकाश रहता है तो वे उसके बाद आने वाले वृहस्पतिवार की बैठक में भाग लेगें। सिंचाई विभाग के नलकूप चालक प्रत्येक सप्ताह में निर्धारित दिवस पर प्रात: 9.30 बजे से 12.30 बजे तक अवश्य अपने नलकूप पर रहेंगे ताकि जनसाधारण को उनसे सम्पर्क करना हो, तो वह उनको नलकूप पर उस समय उपलब्ध हो। प्रत्येक कर्मचारी को किसान सेवा केन्द्र में भाग लेने हेतु एक निख्यित किसान सेवा केन्द्र का निर्धारण उनके नियंत्रक जिला/तहसील/खण्ड स्तरीय अधिकारी द्वारा किया जाता है एवं आदेशों की प्र‍ति सम्बन्धित खण्ड विकास अधिकारी तथा जिलाधिकारी/मुख्य विकास अधिकारी को उपलब्ध कराई जाती है। किसान सेवा केन्द्र का निर्धारण करते समय यह ध्यान दिया जाता है कि यदि किसी कर्मचारी का कार्यक्षेत्र एक सक अधिक न्याय पंचायत में है तो उसे वही न्याय पंचायत बैठक में भाग लेने हेतु आबंटित की जाती है, जिसमें उसके कार्यक्षेत्र का अधिकांश हिस्सा पडता हो। इस केन्द्र में विभागीय कर्मचारी अपने कार्यक्षेत्र में किसी व्यक्ति/जन प्रतिनिधि द्वारा मांगी गई सूचना उसे नियमानुसार उपलब्ध कराते हैं तथा जनसमस्याओं का शीघ्र निस्तारण करते हैं। यदि वरिष्ठ स्तरीय अधिकारी द्वारा निस्तारण आवश्यक हो तो उसे प्रभारी अधिकारी को उपलब्ध कराते हैं। ऐसे प्रकरणों को प्रभारी अधिकारी सम्बन्धित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को निरीक्षण के समय प्रस्तुत करते हैं अन्यथा भिजवाते हैं व इसका अंकन अपने रजिस्टर में रजिस्टर में करते हैं। पाक्षिक रूप से विभिन्न अधिकारियों के पास अनिस्तारित याचिकाओं का विवरण जिलाधिकारी द्वारा नामित नोडल अधिकारी को अनुश्रवणनार्थ उपलब्ध कराया जाता है। जनपद/तहसील स्तरीय अधिकारीगण प्रत्येक वृहस्पतिवार को क्षेत्रीय दौरा करते हुए केन्द्रों का निरीक्षण भी करते हैं तथा टिप्पणी एवं सुझावों को उपलब्ध पंजी में अंकन करते हैं।

(5) शिकायतों की प्राप्ति एवं इसकी सूचना देने की सरल और सुविधापूर्ण कार्यविधि औरशिकायतों का समयबद निवारण

रोस्टर में सिंचाई सम्बन्धी महत्वपूर्ण जानकारी देने के साथ-साथ नहर प्रणाली के प्रभारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के नाम, पते, टेलीफोन नम्बर आदि दिये जाते हैं ताकि कृषकगण अपनी शिकायतों एवं समस्याओं के निराकरण हेतु उनसे आसानी से सम्पर्क स्थापित कर सकें।

(5.1) काश्तकारों को आमतौर पर निम्न शिकायतें हो सकती हैं-

(क) खेत न सींचा गया हो लेकिन सिंचाई दर्ज की गई हो।

(ख) किसी और जरिये से सींचा गया हो, परन्तु सिंचाई विभाग द्वारा सींच दर्ज की गई हो।

(ग) पानी की कमी के कारण फसल बर्बाद हो गई हो।

(घ) खेत की सिंचाई पूरी न होकर आंशिक रूप से हुई हो, सिंचाई डाल (लिफ्ट) से हुई हो परन्तु शुल्क तोड (फ्लो) का लगा हो।

(ड.) एक ही खेत को एक से ज्यादा बार दर्ज किया गया हो।

(च) खेत में बोई गई फसल गलत दर्ज की गई हो।

(छ) काश्तकार का नाम गलत दर्ज किया गया हो।

(ज) गणना करने में गलती हुई हो।

(झ) फसल खराब बीज के कारण बर्बाद हुई हो।

(त) कास्तकार को पर्ची न मिली हो।

(थ) कास्तकार पर तावान गलत लगा हो।

(द) कास्तकार को उसके हिस्से का पानी न मिलता हो।

(ध) स्वीकृत कुलाबा न लगा हो।

(न) रास्टर के अनुसार नहर न चल रही हो।

(प) अन्य।

(5.2) उपरोक्त पैरा 5.1 में उल्लिखित शिकायतों का निस्तारण किन अधिकारियों द्वारा किया जायेगा।

काश्तकार अपनी शिकायतें सम्बन्धित अधिशाषी अभियन्ता, सहायक अथयन्ता, उपराजस्व अधिकारी, अवर अभियन्ता या जिलेदार को दे सकते हैं परन्तु उनका निस्तारण निम्न प्रकार होगा।

(अ) क्रमांक क से ख एवं घ से त तक अंकित शिायतों का निस्तारण सम्बन्धित सहायक अभियन्ता/उपराजस्व अधिकारी द्वारा किया जायेगा।

(ब) क्रमांक - ग अधिशाषी अभियन्ता द्वारा।

(स) क्रमांक - थ के निस्तारण में जिलेदार एवं उसके पश्चात सहायक अभियन्ता द्वारा कास्तकार को अपना पक्ष प्रस्तुत करने हेतु स्थान तथा तारीख की सूचना दी जायेगी, उसके पख्चात निर्णय अधिशाषी अभियन्ता द्वारा लिया जायेगा।

(द) क्रमांक - द की शिकायतों के निवारणार्थ अधिशाषी अभियन्ता, उपराजस्व अधिकारी द्वारा ओसरा बन्दी करवायेंगे।

(य) क्रमांक - ध और न की शिकायतों का अधिशाषी अभियन्ता/सम्बन्धित सहायक अभियन्ता/सम्बन्धित अवर अभियन्ता निराकरण करेंगे।

(र) क्रमांक - प पर शिकायत की प्रकृति के अनुसार जल्द से जल्द निराकरण किया जायेगा।

(5.3) शिकायतों के प्राप्त करने एवं निस्तारण हेतु ग्राम स्तर/ब्लाक स्तर/तहसील स्तर/जिला स्तर पर नामित अधिकारी

1.

ग्राम स्तर

सींच पर्यवेक्षक

2.

ब्लाक स्तर

अवर अभियन्ता/जिलेदार

3.

तहसील स्तर

सहायक अभियन्ता

4.

जिला स्तर

अधिशाषी अभियन्ता/उपराजस्व अधिकारी

(5.4) शिकायतों के निस्तारण हेतु समय सारिणी

उपरोक्त पैरा 5.1 में अंकित ‍िशकायतों को निस्तारित करने हेतु निम्न समय सारिणी होगी।

(क) क्रम संख्या ग से झ के विरूद्ध कास्तकार द्वारा इस्तगासा पर्चा मिलने के 30 दिन के अन्दर दाखिल हो जाना चाहिए। क्रम संख्या - क व ख के विरूद्ध प्रार्थनापत्र पर्चा मिलने के 21 दिन के अन्दर कास्तकार द्वारा दाखिल हो जाना चाहिए तथा उसका निस्तारण सक्षम अधिकारी द्वारा 15 दिनों के अन्दर हो जाना चाहिए।

(ख) क्रम संख्या - द एक सप्ताह

(ग) क्रम संख्या - ध कास्तकार नोटिस आदि देकर जल्द से जल्द निस्तारित करें।

(घ) क्रम संख्या - ध सामान्यत: तीन महीने में।

(ड.) क्रम संख्या - न दो दिन

(च) क्रम संख्या - प शिकायत की प्रकृति पर निर्भर होगा परन्तु जल्द से जल्द निस्तारण हेतु प्रयास होगा।

(5.5) कास्तकारों को सूचना प्राप्ति के अधिकार (यदि ग्राम में समय से उपलब्ध हो)

1. सिंचाई की पर्ची मिलना।

2. कुलाबा की तातील।

3. रोस्टर के विरूद्ध नहर को बन्द करना।

4. तावान लगने, ओसराबन्दी की नोटिस।

5. सिंचाई आदि के विरूद्ध दिये गये प्रार्थनापत्र का निस्तारण।

6. सींच पर्यवेक्षक द्वारा पैमाइश किये जाने की प्रस्तावित तिथि (ग्राम पंचायत में चस्पा की गई नोटिस द्वारा)

7. रोस्टर की सूचना बी.डी.ओ. तथा ग्राम प्रधान के माध्यम से।

6. नागरिक दलों को शामिल करके कार्य निष्पादन की स्वतंत्र जांच पडताल

वर्तमान प्रणाली के अनुसार कृषकों का सिंचित क्षे, सिंचाई कर लगाने हेतु प्रत्येक फसल में नापा जाता है और शासन द्वारा निर्धारित करों पर विभिन्न प्रकार की फसलों पर सिंचाई शुल्क निर्धारित किया जाता है उसकी जमाबन्दी कृषकों से वसूली हेतु सम्बन्धित तहसीलदारों को भेजी जाती है जो निर्धारित राजस्व पर्यवेक्षक एवं जिलेदार आदि के साथ सहयोग अपेक्षित हैं एवं मापी के समय उनकी उपस्थिति का आहान किया जाता है जिससे यथासम्भव कृषकों के नाम, फसल उसका क्षेत्र एवं सींच कर में त्रुटि न हो फिर भी यदि कृषकों को कहीं कोई त्रुटि मिलती है तो उसका इस्तगासा (अर्थात शिकायत) विभाग द्वारा स्वीकार किया जाता है और उन पर एक नियमित अवधि में जांच कर शिकायत का निस्तारण किया जाता है। कषकों की सिंचाई क्षेत्रों की माप एवं अन्य शिकायतों का अनुश्रवण 'उत्तर भारत नहर एवं जल निकास अधिनियम 1873' एवं सिंचाई नियमावली संग्रह में निहित है। समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों दारा उसका यथासम्भव पूर्ण रूप से पालन किया जाता है। नागरिकों को उचित सुविधा प्रदान करने हेतु पड़ताल प्रक्रिया निर्धारित है जिससे किसी भी कृषक पर अनावश्यक अथवा गलत महसूल आदि न लगे।